24 March, 2018

"नदी कहना जानती है" का लोकार्पण

रामनारायण रमण के नवगीत संग्रह नदी कहना जानती है का लोकार्पण


रायबरेली। भीतर से बाहर तक नदी के अविरल, लयबद्ध, कल्याणकारी भाव को समोये वरिष्ठ साहित्यकार श्रद्देय रामनारायण रमण जी का सद्य: प्रकाशित नवगीत संग्रह 'नदी कहना जानती है' का भव्य लोकार्पण लेखागार सभागार में रविवार, 11 मार्च को सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना एवं अतिथियों के स्वागत-सत्कार से हुआ।


इस उत्कृष्ट कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं आलोचक डॉ० ओमप्रकाश सिंह  ने की, जबकि दिल्ली से पधारे युवा कवि एवं आलोचक डॉ अवनीश सिंह चौहान मुख्य अतिथि एवं  सुपरिचित ग़ज़लगो नाज़ प्रतापगढ़ी विशिष्ट अतिथि रहे। डॉ० ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि रमण जी के गीत समकालीन सन्दर्भों को मजबूती से व्यंजित कर रहे हैं और उनमें संवेदना की गहराई है। उन्होंने मजदूर, किसान, गांव, शहर, बेरोजगारी जैसे विषयों को अपने नवगीतों में बखूबी पिरोया है। डॉ० अवनीश चौहान ने रमण जी के तमाम नवगीतों के अर्थ खोलते हुए उनकी सुंदर अनुभूतियों की सराहना की और कहा कि उनके साधु स्वभाव का प्रभाव उनके टटके गीतों में भी परिलक्षित होता है। उन्होंने बताया कि रमण जी के गीतों की भाषा प्रयोगधर्मी है और उनके शब्द गहन एवं नवीन हैं। नाज़ प्रतापगढ़ी ने रमण जी के नवगीतों में उर्दू भाषा के शब्दों के संतुलित प्रयोग एवं रचना कौशल की सराहना की। सुविख्यात गीतकार डॉ० विनय भदौरिया ने रमण जी के शीर्षक गीत 'नदी कहना जानती है' की विस्तार से चर्चा की और उनके गीतों को प्रेम में पगा हुआ बताया। सुप्रसिद्ध आलोचक एवं साहित्यकार रमाकांत ने रमण जी को सर्वथा मौलिक गीतकार मानते हुए कहा कि उन्होंने जो भी लिखा वह अनुभवजन्य सत्य है, इसे पोस्ट-ट्रुथ के युग में भी नाकारा नहीं जा सकता।

चर्चा-परिचर्चा में अन्य साहित्यकारों, विचारकों, आलोचकों ने एक स्वर में कहा कि रमण जी के ताज़ातरीन नवगीत साहित्य, समाज, संस्कृति को पूरी वस्तुनिष्ठता एवं मौलिकता से प्रस्तुत करते हैं। रायबरेली के सशक्त रचनाकार एव साहित्यप्रेमी सर्वश्री आनंदस्वरूप श्रीवास्तव, राजेन्द्र बहादुर सिंह राजन, शिवकुमार शास्त्री, सन्तोष डे, प्रमोद प्रखर, डॉ राकेश चन्द्रा, हीरालाल यादव, दुर्गाशंकर वर्मा, हीरालाल यादव, डॉ० राज आदि के सार्थक वक्तव्यों ने लोकार्पण समारोह को जीवंत बना दिया। मंच का शानदार संचालन चर्चित साहित्यकार जय चक्रवर्ती जी एवं डॉ विनय भदौरिया जी ने संयुक्तरूप से किया। आभार अभिव्यक्ति कार्यक्रम संयोजक रमाकान्त जी ने की।

-डा० अवनीश सिंह चौहान

27 February, 2014

निराला सम्मान डलमऊ 21-02-2014

निराला स्मृति संस्थान, डलमऊ (रायबरेली) की ओर से शुक्रवार 21 फरवरी 2014 को महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की जयंती पर सम्मान समारोह आयोजित हुआ। साहित्यकार डॉ. जगदीश व्योम (दिल्ली) और ओम धीरज (रायबरेली) को निराला सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके अलावा रहमान अली को मुल्ला दाउद सम्मान से सम्मानित किया गया, डा० मिथिलेश दीक्षित को मनोहरा देवी स्मृति सम्मान दिया गया परन्तु मिथिलेश दीक्षित समारोह में उपस्थित नहीं हो सकीं। समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व आई.जी. शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कवि निराला के साहित्यिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने समाज के हित में कई कविताएं लिखीं। साहित्यकार समाज के सच्चे हितैषी होते हैं। उनमें से कवि निराला एक हैं। उनकी कविताएं समाज में व्याप्त कुरीतियों पर करारा प्रहार करती हैं। नवगीतकार और हाइकुकार डा० जगदीश व्योम ने अपना एक नवगीत पढ़ते हुये कहा कि निराला ने मानवीय मूल्यों की जिस थाती को कठिन संघर्ष करते हुये बचाकर रखा, उसे सँभाल कर रखना आज के साहित्यकारों का दायित्व है, निराला स्मृति संस्थान के आयोजक जिस विनम्रता और सेवाभाव से यह समारोह आयोजित करते हैं उसकी मिसाल और जगह कम ही मिल पाती है। विशिष्ट अतिथि के.के. चौधरी एडी.एम. फतेहपुर ने कहा कि निराला की कविताएं भावपूर्ण और क्रांतिकारी थीं। आज के कवियों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। उनकी साफ-सुथरी साहित्यिक शैली ने सभी को अपना प्रशंसक बनाया।निराला संस्थान के संस्थापक राजाराम भारतीय ने कहा कि कवि निराला समाज के अच्छे मार्गदर्शक थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि निराला ने सदैव समाज के हित में कार्य किया है। इस दौरान रामनिवास पंथी की पत्रिका महाप्राण, अपना राज बिराज का विमोचन हुआ। संचालन जय चक्रवर्ती ने किया। इससे पहले सुबह संस्थापक राजाराम भारतीय, नगर पंचायत चेयरमैन कंचन श्रीवास्तव, शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने कस्बे के पथवारी गंगा घाट पर निराला की पत्नी मनोहरा देवी की स्मृति में उनकी प्रतिमा स्थापित की। इस मौके पर सूर्य प्रसाद शर्मा, दुर्गाशंकर वर्मा, सूबेदार वाजपेयी, महावीर सिंह मौजूद रहे।


















निराला सम्मान डलमऊ 21-02-2014
















26 February, 2014

निराला सम्मान डलमऊ 21-02-2014










निराला सम्मान डलमऊ 21-02-2014

निराला स्मृति संस्थान, डलमऊ (रायबरेली) की ओर से शुक्रवार 21 फरवरी 2014 को महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की जयंती पर सम्मान समारोह आयोजित हुआ। साहित्यकार डॉ. जगदीश व्योम (दिल्ली) और ओम धीरज (रायबरेली) को निराला सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके अलावा रहमान अली को मुल्ला दाउद सम्मान से सम्मानित किया गया, डा० मिथिलेश दीक्षित को मनोहरा देवी स्मृति सम्मान दिया गया परन्तु मिथिलेश दीक्षित समारोह में उपस्थित नहीं हो सकीं। 
समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व आई.जी. शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कवि निराला के साहित्यिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने समाज के हित में कई कविताएं लिखीं। साहित्यकार समाज के सच्चे हितैषी होते हैं। उनमें से कवि निराला एक हैं। उनकी कविताएं समाज में व्याप्त कुरीतियों पर करारा प्रहार करती हैं। नवगीतकार और हाइकुकार डा० जगदीश व्योम ने अपना एक नवगीत पढ़ते हुये कहा कि निराला ने मानवीय मूल्यों की जिस थाती को कठिन संघर्ष करते हुये बचाकर रखा, उसे सँभाल कर रखना आज के साहित्यकारों का दायित्व है, निराला स्मृति संस्थान के आयोजक जिस विनम्रता और सेवाभाव से यह समारोह आयोजित करते हैं उसकी मिसाल और जगह कम ही मिल पाती है। विशिष्ट अतिथि के.के. चौधरी एडी.एम. फतेहपुर ने कहा कि निराला की कविताएं भावपूर्ण और क्रांतिकारी थीं। आज के कवियों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। उनकी साफ-सुथरी साहित्यिक शैली ने सभी को अपना प्रशंसक बनाया।निराला संस्थान के संस्थापक राजाराम भारतीय ने कहा कि कवि निराला समाज के अच्छे मार्गदर्शक थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि निराला ने सदैव समाज के हित में कार्य किया है। इस दौरान रामनिवास पंथी की पत्रिका महाप्राण, अपना राज बिराज का विमोचन हुआ। संचालन जय चक्रवर्ती ने किया। इससे पहले सुबह संस्थापक राजाराम भारतीय, नगर पंचायत चेयरमैन कंचन श्रीवास्तव, शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने कस्बे के पथवारी गंगा घाट पर निराला की पत्नी मनोहरा देवी की स्मृति में उनकी प्रतिमा स्थापित की। इस मौके पर सूर्य प्रसाद शर्मा, दुर्गाशंकर वर्मा, सूबेदार वाजपेयी, महावीर सिंह मौजूद रहे।